आ घा त
उनकी वो तीखी बात ,,
लागी दिल पर ज्यूं आघात ,,
कभी न सोचा था ----
करेंगे वो हमसे ऐसी बात,,
जी तो करता है ,,
रहें सदा खामोश ,,
करें ना अपने मन को ----
कभी भी यूं हताश ,,
कौन जानेगा ?
इस मन की वो व्यथा ,,
आँसू बन बह रही है,,
जो की हमने वो खता ,,
तुम ही करो अब भग्वन ,,
इस बात का निदान ,,
हमें भी तो सिखाओ ----
मीरा की तरह विष पान करना .....
मीरा सा रस गान करना ........
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