Friday, 28 September 2012

Intjaar

इन्तजार


आज है बस ?..
यही  इन्तजार ,,,,,,,
कब होगा मुझे !
सभी का दीदार ......

वो कैसा दिन था ?
जब मैं पड़ी धरती पर ....
सच में था गोड  का ,
हाथ उस दिन  मुझपर ?..

निकलते निकलते उस रोज ?
क्यों  निकली थी उस पार .....
कुछ ना  देखा इदर उधर,
जा पड़ी जमीन पर ?...

डॉ  ने बतलाया ,
लगी हड्डी मे  है मार,,,,,,
X रे  मे दिखा रहा है,
सूजन  डिस्क  के अन्दर ........

कब होगा मेरी?
इस हालत मे  सुधार ..
सोचती हूँ  दिनभर ,
पड़ी हूँ  मैं  लाचार ...

हे  भगवन ,
करो तुमभी तो सुविचार ?
नयी नयी उमंगें थी ..
इस मन के अन्दर ....

कब देखोगे  तुम  ?
प्रभु मेरी ओर ....
कब करोगे मेरी ?...
पीठ का दर्द दूर ......

कर सकू मैं सेवा ..
तुम्हारी निरंतर ....
और कर सकूं बैठकर ,
बस ध्यान  निरंतर .......








 ,
लगी हड्डी मे  है मार ....

लगी हड्डी मैं है मार .......



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